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भारत मे विवाह दुविधा , अनिश्चितता और असुरक्षा का भयावह उदाहरण है और जीवन जीने का यह मूर्खता पूर्ण तरीका हमारे जीवन के हर क्षेत्र में व्याप्त है । ।सुनिश्चितता हमारे जीवन की पहचान नहीं है । आप केवल कार्य कर सकते हैं , परिणाम आपके हाथ में नहीं है । भारत में प्रचलित विवाह मष्तिष्क विहीन सरीसृपों के द्वारा रचित किसी परम्परा की पहचान है ।इसीलिए हमारे प्राचीन ग्रन्थों में कम से कम एक सच तो लिखा है कि फल किये जाओ , परिणाम की चिंता मत करो । यदि आपने परिणाम को ध्यान में रखा तो हो सकता है कि आप कोई भी काम कर ही न पाएं । जीवन के हर क्षेत्र में इतनी झूठ और इतनी बेईमानी व्याप्त है कि सब कुछ करने के बाद भी हो सकता है कि आपके हाथ कुछ न लगे । कहावत है कि असफलता यह बतलाती है कि आपने कार्य पूरी ईमानदारी से नहीं किया है । पर यह कहावत हमारे समाज पर फिट नहीं बैठती । हमारे लिए इस कहावत का परिवर्तित रूप इस तरह से होना चाहिए । असफलता यह बतलाती है कि आपने अपना कार्य केवल ईमानदारी से किया है । हम इस व्यवस्था में हमेशा ठगे हुए से , लुटे पिटे नज़र आते हैं । केवल पैसे कमा लेना , ऊंचा पद पा लेना , पैसों के कारण बड़े आदमी होने का दर्जा पा लेना जीवन मे सफलता और संतुष्टि का पैमाना नहीं है । यदि समाचार पत्रों में प्रकाशित सारे समाचारों को एक साथ मिलाकर कोई धारणा बनाते हैं तो अपनी सोच से ही घबराहट होने लगती है । डर लगने लगता है । विवाह सम्बन्धी सारे समाचारों को एक साथ मिलाकर सोचें तो भारत मे प्रचलित विवाह सम्बन्धों से ही घृणा होने लगती है।—-सब कुछ पागलपन की हद तक दुविधामय औऱ अनिश्चित ।—- विवाह तय करने में इतने सारे कारण शामिल कर लिए गए हैं कि कहीं भी रिश्ता तय होंना भी लगभग असंभव सा होता जा रहा है । उम्र, जाति, सम्प्रदाय, धर्म, स्टेटस, स्थान ,लेन देन , जन्म कुंडली, विदेश में या देश मे निवास, सास ससुर की उपस्थिति, अविवाहित बहिन , अपना मकान कार , रोज़गाररत लड़कियों के माता पिता और भाइयों की उनके वेतन के लालच के कारण उनके विवाह न होने देने की इच्छा आदि ऐसे अनेक कारण हैं जिससे रिश्ता पक्का होना भी मुश्किल हो गया है। एक प्रत्याशी पचासों सम्भावित स्थानों पर सम्पर्क करता है, इससेसब कुछ अनिश्चित हो गया है। इसकी तुलना इस उदाहरण से की जा सकती है कि एक शहर के पचास परीक्षा केंद्र हैं ,जिनमें हजारों विध्धर्थियों और सैकड़ों परीक्षको को परीक्षा कार्य में भाग लेना है। प्रत्येक का एक निश्चित परीक्षा केंद्र है पर न तो विध्धर्थियों को और न परीक्षकों को उनके परीक्षा केंद्र केबारे में बताया गया है। सभी को एक निश्चित समय पर अपने अपने परीक्षा केंद्रों पर पहुंचना है। ऐसी स्थितिमें जो मारा मारी, भागदौड़, और अराजकता होगी वही अराजकता विवाह निश्चित करने के लिए है। सब कुछ दुविधामय, अनिश्चित और असुरक्षित । अध्य्यन बतलाते हैं कि सगाई और शादी के मध्य जितना ज्यादा अंतराल होता है , सम्बन्ध टूटने की संभावना उतनी ही बढ़ती जाती है । यदि आप लड़की या लड़का देखने जाते हैं तो इसकी भी कोई गारंटी नहीं है कि विवाह के लिए वही लड़का या लड़की उपलब्ध होगी, जिसे देखकर आपने रिश्ता तय किया है । । ———-यह भी सम्भव है कि विवाह के लिए कोई और प्रत्याशी दिखाया जाए और विवाह के समय उसे बदल दिया जाए । ———–प्रत्याशी का वह बॉयोडाटा नहीं हो जो आपको भेजा गया है । ———तलाकशुदा और विधवा विधुर प्रत्याशी स्वयं को अविवाहित घोषित कर देते हैं । ———विवाह के समय वर पक्ष और वधु पक्ष में भोजन, लेंन देन ,स्वागत,संगीत आदि किसी भी बात पर झगड़ा हो सकता है और बारात वापस की जा सकती है ।————– लड़की लड़के के काला होने पर, लड़का पसंद न आने पर, लड़के के अपढ़ होने पर आई हुई बारात को वापस भी कर सकती है । ———–विवाह पूर्व लड़की या लड़के वाला मिलने को किसी एक पक्ष को बुलाता है और यह भी हो सकताहै कि मिलने आनेवाला पक्ष भटकता ही रहे , और बुलाने वाला पक्ष फोन ही रिसीव न करे । ———ऐसे भी समाचार हैं कि विवाह निश्चित होने पर, खर्च की एक बड़ी धनराशि ,लड़के वालों से वसूल करने के बाद लड़की वाला गायब ही हो जाये ।————— लड़के वाला बारात लेकर पहुंचे और लड़की वाले का उस पते पर घर ही न मिले ।———— लड़की से विवाह की बात करने आने वाला उसका भाई हो सकता है , उसका पति ही निकले । और इसमें लड़के वाले से धन दौलत लूटने की उनकी मिली जुली साज़िश हो । यह भी सम्भव हो कि लड़की विवाह न करना चाहे औऱ माता पिता के दवाब में उसे विवाह को मजबूर किया जाए ।————–यह भी हो सकता है लड़की किसी अन्य से विवाह करना चाहे औऱ उस लड़के को पसंद ही न करती हो जिससे उसका विवाह कर दिया गया हो। ———–ऐसे भी अनेक उदाहरण हैं , जहां लड़के वाला बारात लेकर पहुंचा और लड़की घर से भाग गई । ऐसा भी हुआ है कि बारात आने पर लड़की और लड़के वालों में किसी बात पर विवाद हुआ, हाथापाई और मारपीट हुई । लड़की वालों ने उसी समय कहीं से भी दूसरा लड़का तलाशा, औऱ बारात वापस कर दूसरे लड़की से शादी कर दी । ऐसे समाचार भी हैं कि विवाह के समय लड़की ने बारात लेकर आये दूल्हे के स्थान पर ,विवाह स्थल पर मौजूद अपने प्रेमी के गले में वरमाला डाल दी । ————–ऐसी भी घटनाएं घटी हैं जहां युवती के प्रेमी ने विवाह स्थल पर दूल्हे और अपनी प्रेमिका को जान से मारने की कोशिश की । ऐसा भी हुआ है कि विवाह के बाद विदा होने पर वधु सजी हुई , ज़ेवरों से लदी हुई , बाहर खडे इंतज़ार करते प्रेमी के साथ कार में बैठ कर फुर्र से उड़ गई । ———-ऐसी भी एक घटना है जिसमे बारात वापिसी पर वधू शौच के बहाने रास्ते में अचानक गायब हो गई । बारात वापस आने पर ऐसी भी सूचनाएं हैं कि वधु ने ससुराल में रहने से इनकार कर दिया । पति से किसी भी तरह के सम्बन्ध रखने को वह तैयार नहीं थी । 2-3 दिन बाद वह वापस मायके चली गई । ऐसे भी समाचार हैं , विवाहोपरांत अनेक युवतियां वर पक्ष के यहां से धन दौलत, जेवर लेकर गायब हो गईं । पकड़े जाने पर उन्होंने बताया कि विवाह ही उन्होंने इस तरह की चोरी करने के लिए किया था । धीरे धीरे इस तरह की घटनाएँ बढ़ती जा रही हैं । अब 498 क और तलाक को अनेक लड़कियों के माता पिता धन कमाने का जरिया बनाने लगे हैं । योजनाबद्ध तरीके से पहिले पैसे लेकर विवाह करते हैं ।फिर 498 क लगाकर शिकायत वापस लेने और तलाक के जरिये धन कमाते हैं । पकड़ी जानेवाली लड़कियों ने बताया कि कुछ गाँवो में हर घर में लड़कियों को ऐसा करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है । अनेक मामलों में विवाहोपरांत कुछ दिनों बाद वर पक्ष को समझ आया कि लड़की पागल है। विवाह के दौरान दवाओं से पागलपन छिप गया था । पति के इस कारण पत्नी से अलग होने की कोशिश की तो मायके वालों ने दहेज़ एक्ट का मुकदमा दर्ज करा दिया । परिवार में पतिपत्नी के मध्य किसी भी तर।ह के विवाद होने पर दहेज़ एक्ट की शिकायत होने की सम्भावना हमेशा बनी रहतीहै । ,———–पत्नी की यदि किसी दुर्घटनावश मृत्यु हो जाये , या बिना बताए कहीं चली जाए तो मायके वाले दहेज़ मृत्यु की शिकायत करने से भी नहीं चूकते । विवाह के नाम पर धन्धा करने वाली लड़कियों को जब पुलिस ने पकड़ा तो एक बार तो चार युवको ने एक साथ बोला – यह तो मेरी पत्नी है । ऐसी भी घटनाएं हैं जहां पुरुष अपने मित्र की शादी में भाग लेने पहुंचा । वहां जाकर ज्ञात हुआ कि उसका मित्र जिस युवती से विवाह कर रहाहै, वह तो उसकी पत्नी है । ऐसा भी हुआ है कि लड़की का कोई प्रेमी है , लड़की की शादी जबरदस्ती कहीं और कर दी । कुछ समय बाद लड़की ने प्रेमी से न मिल पाने के कारण आत्महत्या कर ली । अब तो ऐसे समाचारों की संख्या बढ़ती जा रही है जहाँ वधु अपने प्रेमी से मिलकर पति की हत्या करने लग गई हैं यह कैसा समाज है जहां दहेज न लेने वाले युवकों को भी दहेज़ एक्ट से आरोपित कर दिया जाता है। लड़की वाला बाज़ार में लाखों करोड़ों रुपये लेकर लड़का खरीदने पहुंच जाए तो अपराध नहीं है । दहेज एक्ट की शिकायत वापस लेने के लिए लड़की वाला लडके वालों को ब्लैकमेल करे तो यह उसका विशेषाधिकार है । ये सारे समाचार प्रत्येक व्यक्ति को ज्ञात रहते हैं पर वह जिद्दी और बुद्धिहीन है। विवाह व्यवस्था की कटु सच्चाइयों को वह स्वीकार नहीं करता । वह इन सूचनाओं के प्रति उदासीन रहने की कोशिश करता है। ये सारी सूचनाएं उसके अचेतन में चली जाती हैं । कायर, परम्परावादी और अंधविश्वासी होने के कारण किसी भी तरह के परिवर्तन को वह तैयार नहीं होता । पर अचेतन में विद्दमान यह सूचनाएं उसे उद्विग्न बनाये रखती हैं । पति पत्नी के मध्य प्रेम और मित्रता जैसा कुछ होता नहीं हैं । अतः पति पत्नी आपस में समझ ही नहीं पाते कि वे सन्तुष्ट हैं या असन्तुष्ट । दुखी हैं या खुश हैं । बच्चे पैदा हो जाते हैं । बच्चों के लालन पालन में उनका जीवन निकल जाता है। इस विसंगति को मेरे पास परामर्श को आये एक 47 वर्षीय पुरुष ने बड़े शानदार ढंग से अभिव्यक्त किया था । वह तीन विषयों में एम ए था ।उसने मुझसे कहा –सर मेरे 3 पुत्रियां हैं । अपनी 20 वर्षीय पुत्री के विवाह के लिए लड़का व पत्नी के जिंदा होते हुए भी अपने पुनः विवाह के लिए लड़की देखने आया हूँ । 25 वर्षों से विवाहित हुँ । पर मुझे कभी लगा ही नहीं कि में विवाहित हूँ । आज भी मै विवाह पूर्व की स्थिति जैसा ही असन्तुष्ट व प्यासा हुँ ।

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