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#क्या_शादी_करना_अभिशाप_है…???

इस कहानी को पढ़िए उसके बाद आपको पता चलेगा कैसे किसी की नाजायज जिद किसी की जिंदगी (घर-परिवार-कॅरियर) सब बर्बाद कर देती है….! 😔😏😒😢👇👇👇उसकी ‘छोटी-सी’ गलती थी, मेरी जिंदगी तबाह हो गईकिसी आम युवक की तरह लाखों के पैकेज पर जॉब करने की ख्वाहिशों के बीच मैं दिल्ली में एक बड़ी आईटी कंपनी में काम कर रहा था। कंपनी की ओर से मुझे अमेरिका भेजा जा रहा था। वहां जाने से पहले परिवार की सहमति से मैंने 2011 में अरेंज मैरिज की। मेरे पिता नहीं हैं, मां को मेरी शादी का बड़ा चाव था। मैं परिवार का इकलौता बेटा हूं। लड़की कोलकाता की थी। शादी हो गई। हम इंदिरापुरम में रहने लगे। ऑफिस नोएडा में था। कुछ हफ्ते बहुत ठीक से कटे, फिर परेशानी शुरू हुई। मेरी पत्नी अपने माता-पिता को साथ रखने या फिर कोलकाता शिफ्ट होने का दबाव बनाने लगी। मैंने कहा कि पहले अमेरिका चलते हैं। सब ठीक रहा तो बाद में इस मुद्दे को देख लेंगे।अमेरिका जाने का समय भी आ गया। वीजा तैयार था और हम दोनों का टिकट भी। 2012 के दिसंबर में जाने की तैयारी थी। लेकिन एक दिन वह अड़ गई। कहने लगी कि मैं तो बिल्कुल नहीं जाऊंगी और आपको भी जाने नहीं दूंगी।मुझे यह छोटी-सी प्रॉब्लम लगी। लगा कि इसे आम छोटे झगड़े की तरह ही सुलझा लेंगे, लेकिन होना कुछ और ही था। मुझे अब भी याद है 15 नवंबर 2012 का वह दिन, जब घर लौटा तो देखा वह नहीं थी। कुछ देर बाद ही इंदिरापुरम थाने से पुलिस आई और कहने लगी कि मुझ पर मेरी पत्नी ने कई आरोप लगाए हैं। मुझ पर आरोप था कि मैंने दहेज लिया और घरेलू हिंसा की है। मुझे गहरा शॉक लग गया। मेरी गिरफ्तारी हुई।जब उसने मुझे पर केस किया था, तब वह गर्भवती थी। हमारा बच्चा हुआ। उसने एसएमएस कर जानकारी दी कि बेटा हुआ है। लेकिन मुझे यह भी बताया गया कि बच्चे से मुझे तभी मिलने दिया जाएगा जब मेरा पूरा परिवार उससे माफी मांगेगा। मैं इसके लिए तैयार था, लेकिन और शर्तें आने लगीं। मैंने कहा कि अगर नहीं साथ नहीं रहना हो तो तलाक ले लो, लेकिन इस तरह का बर्ताव क्यों? लेकिन इस बीच वह कोर्ट पहुंच गई। उसने कोर्ट में दहेज लेने का मामला दायर कर दिया। मैं मानसिक रूप से टूटने लगा। 30 साल की उम्र में मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मेरे साथ क्या हो रहा है। अमेरिका जाने का मेरा सपना टूट चुका था। इस लफड़े में नोएडा वाली नौकरी भी छूट गई।मैं मां के पास कोलकाता लौट गया। नौकरी नहीं थी। पैसे खत्म हो गए थे। बीच में मुझे 50 दिन जेल में भी गुजारने पड़े। इसके बाद केस का ट्रायल शुरू हुआ। हुगली में केस हुआ था। एक साल तक सभी पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने मेरे पक्ष में फैसला दिया। मुझे न सिर्फ केस से मुक्त कर दिया गया था, बल्कि मेरे पक्ष में कोर्ट ने काफी सकारात्मक टिप्पणी भी की थी। लेकिन अभी मुझे कानूनी झंझटों से ही मुक्ति मिली थी। कई सवालों के जवाब आने अभी बाकी थे। चूंकि जिंदगी चलानी थी इसलिए मजबूर होकर मैंने कोलकोता में फोर्थ ग्रेड की एक सरकारी नौकरी कर ली, जबकि मैं इंजीनियर हूं।अब तो सब भूल चुका हूं। 2012 से 2015 के बीच मेरी हालत देखकर मेरी मां भी सदमे में आ गई थीं। इलाज के अभाव और मानसिक तनाव से उनकी जान चली गई। अंतिम समय में तो मां ने मुझे पहचानना भी छोड़ दिया था। अब मैं तन्हा हूं। अब मेरे लिए जिंदगी बस वक्त बिताने का जरिया है। कोई दोस्त नहीं बचा। सब अपनी दुनिया में हैं और मेरी कोई दुनिया नहीं है।मेरे दोस्तों की पत्नियों ने अपने पति को मुझसे दूर रहने को कहा था। मैं आत्महत्या नहीं कर सका, लेकिन ऐसा ख्याल कई बार आया। जब मैं अपने बेटे से अक्टूबर 2016 में मिला तो उसने मुझे अंकल बोला। पत्नी भी मिली। उसे मेरी हालात का पता चल चुका था। उसने मुझसे कहा कि उससे छोटी मिस्टेक हो गई थी, केस नहीं करना चाहिए था। उसकी उस छोटी-सी मिस्टेक ने मेरी जिंदगी को बड़े तरीके से तबाह कर दी थी। वह मेरे पास लौटना भी चाहती थी, नए सिरे से जिंदगी जीने के लिए। लेकिन अब मेरे पास जिंदगी कहां है? अब मैं वह नहीं रहा जो खुद अपनी जिंदगी के बारे में कुछ तय कर सकता है। 35 साल की उम्र में 75 साल-सा महसूस करता हूं। शरीर से बीमार हूं और मन से परेशान। इस बीमारी का इलाज शायद उन बीते पांच बरसों में था, जो कभी लौट नहीं पाएंगे। मैं बस इतना चाहता हूं कि किसी भी महिला के साथ कोई पुरुष गलत न करे और कोई महिला भी कानून का गलत तरीके से इस्तेमाल कर किसी की हालत मेरी जैसी न करे.

#Feminism_is_Now_Cancer

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