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Matrimonial

झूठे दहेज के मुकदमों के कारण, पुरुष के दर्द से ओतप्रोत एक मार्मिक कृति

“मैंने दहेज़ नहीं माँगा”साहब मैं थाने नहीं आउंगा,अपने इस घर से कहीं नहीं जाउंगा,माना पत्नी से थोड़ा मन-मुटाव था,सोच में अन्तर और विचारों में खिंचाव था,पर यकीन मानिए साहब, “मैंने दहेज़ नहीं माँगा” मानता हूँ कानून आज पत्नी के पास है,महिलाओं का समाज में हो रहा विकास है।चाहत मेरी भी बस ये थी कि माँ

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